अनिल की गाà¤à¤§à¥€ माय फादर
Written by admin on August 7th, 2007 in Movies.
बतौर अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ अनिल कपूर ने अपने करियर में गंà¤à¥€à¤° और हलà¥à¤•ी-फà¥à¤²à¥à¤•ी फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ के बीच सांमजसà¥à¤¯ बनाठरखा है। à¤à¤• ओर जहाठवे ‘तेजाब’, ‘राम-लखन’ और ‘रखवाला’ जैसी फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ करते रहे, वहीं दूसरी ओर ‘लमà¥à¤¹à¥‡â€™, ‘ईशà¥à¤µà¤°â€™ और ‘विरासत’ जैसी फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ में नजर आà¤à¥¤
इस समय अनिल के करियर में à¤à¤• ठहराव आ गया है। वे बेमतलब की à¤à¥‚मिका करने के बजाय घर बैठना पसंद करते हैं। इन दिनों उनकी बेटी सोनम ‘साà¤à¤µà¤°à¤¿à¤¯à¤¾â€™ से अपने फिलà¥à¤®à¥€ करियर का आगाज कर रही हैं। अनिल उनकी मदद करने के साथ-साथ फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ à¤à¥€ बन गठहैं।
यूठतो अनिल ने साà¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ में दो-तीन फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ बनाई हैं, लेकिन सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° रूप से वे पहली बार इस मैदान में उतरे हैं। ‘गाà¤à¤§à¥€ माय फादर’ जैसी गंà¤à¥€à¤° फिलà¥à¤® बनाकर अनिल ने फिलà¥à¤® माधà¥à¤¯à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अपना पà¥à¤¯à¤¾à¤° जताया है। वे हमेशा से अचà¥à¤›à¥€ फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¶à¤‚सक रहे हैं।
इस फिलà¥à¤® में महातà¥à¤®à¤¾ गाà¤à¤§à¥€ और उनके बेटे हरीलाल के संबंधों को दिखाया है। जब अनिल को इस फिलà¥à¤® के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• फिरोज खान ने कहानी सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेहद पसंद आई। अनिल ने अपने परिवार के साथ बैठकर अगले दिन फिर से कहानी सà¥à¤¨à¥€à¥¤ कहानी सà¥à¤¨à¤•र सबकी आà¤à¤–ों से आà¤à¤¸à¥‚ आ गà¤à¥¤ सà¤à¥€ इस बात से à¤à¤•मत थे कि इस कहानी पर फिलà¥à¤® जरूर बनाई जानी चाहिà¤à¥¤ अनिल ने फिलà¥à¤® के वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की अनदेखी कर अपने दिल की बात मानी और फिलà¥à¤® बना डाली। अनिल उसूलों के पकà¥à¤•े हैं। जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने देखा कि इस फिलà¥à¤® में उनके लिठकोई गà¥à¤à¤œà¤¾à¤‡à¤¶ नहीं है तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ बने रहना ही उचित समà¤à¤¾à¥¤
अकà¥à¤·à¤¯ खनà¥à¤¨à¤¾ ने इस फिलà¥à¤® में हरीलाल का किरदार निà¤à¤¾à¤¯à¤¾ है। अनिल के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• अकà¥à¤·à¤¯ के अलावा इस रोल को कोई और नहीं निà¤à¤¾ सकता था। अकà¥à¤·à¤¯ के काम से वे बेहद खà¥à¤¶ हैं और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी आगामी फिलà¥à¤® के लिठà¤à¥€ अकà¥à¤·à¤¯ को चà¥à¤¨ लिया है।
यह फिलà¥à¤® काफी अरसे से बनकर तैयार है। इसके पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में देरी की वजह बताते हà¥à¤ अनिल कहते हैं कि जब यह फिलà¥à¤® बनकर तैयार हà¥à¤ˆ तब ‘लगे रहो मà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¾à¤ˆâ€™ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ थी। उस फिलà¥à¤® का विषय à¤à¥€ गाà¤à¤§à¥€à¤œà¥€ पर आधारित था। इसलिठइस फिलà¥à¤® का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ आगे खिसका दिया।
अनिल का कहना है कि फिलà¥à¤® चले या न चले उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यह फिलà¥à¤® अपने दिल से बनाई है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस बात की सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खà¥à¤¶à¥€ है।
Source : http://content.msn.co.in/Hindi/Entertainment/Articles/20-07-07anilkapoor.htm

August 7th, 2007 at 5:31 pm
हिनà¥à¤¦à¥€ में इतनी अचà¥à¤›à¥€ समीकà¥à¤·à¤¾ की है। हिनà¥à¤¦à¥€ में और à¤à¥€ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं लिखते।