निरीक्षण
पुलिस में सिपाहियों की भर्ती के लिये साक्षात्कार के दौरान अभ्यार्थियों को एक व्यक्ति की तस्वीर दिखाते हुये साक्षात्कारकर्ता ने कहा - ”एक पुलिसवाले में निरीक्षण करने की शक्ति का होना बहुत आवश्यक है। इस चित्रको ध्यान से देखो और बताओ कि इसमें तुम्हें क्या खास बात दिखाई देती है ?”
पहले आवेदक ने कहा - ”इस आदमी के सिर्फ एक कान है ?”
”तुम जा सकते हो” - साक्षात्कारकर्ता ने असंतुष्टि का भाव प्रदर्शित करते कहा।
दूसरा आवेदक आया और बोला - ”यह एक कान वाला आदमी है।”
”बाहर निकल जाओ” - साक्षात्कारकर्ता चिल्लाया।
अब तीसरे आवेदक की बारी थी। पहले दो आवेदकों ने उसे बताया कि साक्षात्कारकर्ता को यह सुनना पसंद नकि तस्वीर में जो आदमी है उसके एक ही कान है।
”इस जानकारी के लिये धन्यवाद”- तीसरे आवेदक ने कहा और साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश कर गया।
उसने पहले थोड़ी देर तक तस्वीर को घूरा फिर बोला - ”यह आदमी कान्टेक्ट लेस पहनता है।”
साक्षात्कारकर्ता इस नये निरीक्षण से प्रभावित हुआ । बोला - ”शाबाश ! लेकिन मुझे बताओ कि तुमने ये कैसे जाना ?”
”चूंकि इस आदमी के एक ही कान है इसलिये वह चश्मा तो पहन ही नहीं सकता न!” - आवेदक ने कहा ।
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कारण
एक युवक नौकरी के लिये आवेदन पत्र भर रहा था। जब वह इस प्रश्न पर आया ”क्या आप कभी गिरफ्तार किये गये हैं ?” उसने लिखा ” नहीं” अगला प्रश्न (जो उन लोगों से सम्बन्धित था जिन्होंने उक्त प्रश्न का उत्तर हां में दिया है ) था - ”कारण ?” युवक ने उसके सामने लिखा - ”कभी पकड़ा नहीं गया” ।
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मजाक
एक युवक नौकरी के लिये इंटरव्यू देने गया। इंटरव्यू की समाप्ति पर साक्षात्कारकर्ता ने उससे अंतिम सवाल पूछा - ”आप कितने वेतन की अपेक्षा रखते हैं ?’
युवक ने जवाब दिया - ”यही कोई पांच लाख रूपये सालाना के आसपास वेतन और उसी अनुसार भत्ते।’
साक्षात्कारकर्ता - ”अच्छा ये बताओ अगर तुम्हें दस लाख रूपये सालाना वेतन, करीब पांच लाख रूपये के आसपास भत्ते, पॉश कॉलोनी में एक बंगला, आने जाने के लिये एक होंडा सिटी और शहर से बाहर जाने पर मुफ्त हवाई यात्रा दी जाये तो तुम्हें मंजूर होगा।’
युवक - ”वाह क्या बात है ! कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे ?’
साक्षात्कारकर्ता - ”हां, लेकिन मजाक पहले तुमने शुरू किया था।’
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सरकारी काम
तीन आदमी एक देहाती सड़क के किनारे पर काम कर रहे थे। एक आदमी 2-3 फीट गहरा गङ्ढा खोदता था और दूसरा उसे फिर मिट्टी से भर देता था। तब तक पहला आदमी नया गङ्ढा खोद लेता था और दूसरा आदमी उसे भी मिट्टी से भर देता था। काफी देर से यही क्रम चल रहा था। तीसरा आदमी सड़क किनारे ही एक पेड़ की छाया में बैठा था।
एक राहगीर जो सुस्ताने के लिये पास ही एक पेड़ के नीचे रुका था, काफी देर से इस कार्यक्रम को देख रहा था। आखिरकार उससे रहा नहीं गया और उसने उनके नजदीक जाकर पूछ ही लिया - यहां क्या काम हो रहा है ?
हम सरकारी काम कर रहे हैं - उनमें से एक आदमी ने बताया।
वो तो मैं देख ही रहा हूं। लेकिन तुम लोग गङ्ढा खोदते हो फिर उसे भर देते हो फिर खोदते हो फिर भर देते हो। आखिर इस काम से हासिल क्या हो रहा है। क्या यह देश के धन की बर्बादी नहीं है ? राहगीर ने थोड़ा गुस्से से कहा।
जी नहीं, आप समझे नहीं श्रीमान । हम तो अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। देखिये मैं आपको समझाता हूं। पहले आदमी ने अपना पसीना पोंछते हुये कहा ।
यहां हम कुल तीन आदमियों की डयूटी है। मैं, मोहन और वह जो पेड़ की छाया में बैठा है श्याम। हम लोग यहां पौधारोपण कार्य के लिये लगाये गये हैं। मेरा काम है गङ्ढा खोदना, श्याम का काम है उसमें पौधा लगाना और मोहन का काम है उस गङ्ढे में मिट्टी डालना ।
अब चूंकि श्याम की तबीयत आज खराब है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि हम दोनों भी अपना काम न करें।
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जिम्मेदार
साक्षात्कारकर्ता, आवेदक से - ”इस पद के लिये हमें ऐसा व्यक्ति चाहिये जो जिम्मेदार हो ।”
आवेदक - ”मैं इस पद के लिये बिलकुल योग्य हूं क्योंकि मेरी पिछली नौकरी के दौरान जब भी कुछ नुकसान होता था तो वे कहते थे कि इसके लिये मैं जिम्मेदार हूं।
